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  प्रश्न: गुरुजी, यदि सनातन आध्यात्मिक ज्ञान ही पूर्ण सत्य विज्ञान सम्मत ज्ञान है तो फिर संसार में इसके प्रचार प्रसार में लगे लोग इतने कम क्यों हैं ? जबकि जिन धाराओं को फैलाने के इतिहास में बलात् पक्षपाती दृष्टि से कर लगाकर संख्या बढ़ा लेने...

जब एक और नेक ही से उद्भूत हो आज हम सब अनेक हैं ।फिर क्यों नहीं आज हम सबके इरादे नेक हैं। उस परं-एक की, अपनी अद्वैत भाव दृष्टि की अवस्था में, विशिष्ट द्वैतों के माध्यम से सृजित हुई व्यवस्था में ही सम्पूर्ण सृष्टि का व्यक्तित्व,विस्तार...